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पाठ्यसामग्री का अर्थ (Meaning of Content):-
पाठ्यसामग्री का अर्थ (Meaning of Content):-
- पाठ्यसामग्री किसी पाठ्यक्रम का आधार होता है यह वह सामग्री होती है जिसे पढ़ना होता है।सम्पूर्ण पाठ्यसामग्री पाठ्यक्रम के चारों ओर घूमती है।
- किसी भी पाठ्यसामग्री की पहचान करना आसान होता है। जबकि उसी पाठ्यसामग्री को परिभाषित करना अपेक्षाकृत कठिन होता है क्योंकि किसी भी पाठ्यसामग्री की पहचान तभी सम्भव हो पाती है जब हम पहले से उस।
- पाठ्यसामग्री से परिचित होते हैं अन्यथा पहचान करना सम्भव नहीं है। जबकि परिभाषित करने के लिए जरूरी है कि आप उस पाठ्यसामग्री को निर्मित करने वाले घटकों को जानते हों। तभी आप उसे परिभाषित कर पाएंगे अन्यथा घटकों की पहचान किए बिना पाठ्यसामग्री को परिभाषित करने पर हो सकता है कि आप जाने-अनजाने में किसी और पाठ्यसामग्री को ही परिभाषित करने लगे। उदाहरण के लिए- आप कार्य होता देखकर, ये तो कह सकते हैं कि यहाँ कार्य हो रहा है और अमुक व्यक्ति या जीव उस कार्य को कर रहा है परन्तु आप उस कार्य की परिभाषा आसानी से नहीं दे सकते।
- आप सरल रेखा तो खींच सकते हैं, किसी दूसरे के द्वारा बनाई गई सरल रेखा की पहचान भी कर सकते हैं परन्तु सरल रेखा की परिभाषा देना आसान नहीं है। इसी प्रकार आप व्यक्ति या पिण्ड को गति करते देखकर, पहचान सकते हैं कि वह व्यक्ति या पिण्ड गति कर रहा है परन्तु गति को आप कैसे परिभाषित करेंगे? घटकों की पहचान किए बिना आप अपने पास स्थित किसी पिण्ड की गति एक पल के लिए पहचान भी लेगे परन्तु दूर स्थित पिण्ड की गति को कैसे पहचानेंगे? इन सब का ज्ञान तभी सम्भव हैजब हमें पाठ्यसामग्री का ज्ञान हो।
- पाठ्यसामग्री को अन्तर्वस्तु भी कहा जाता है। पाठ्यसामग्री के अन्तर्गत चयन की अन्य सामान्य स्थितियों की तरह ही पाठ्यचर्या के लिए पाठ्यक्रम के चयन में भी प्रायः उपयोगिता एवं सार्थकता को आधार बनाने का प्रयास किया जाता है।
- पाठ्यक्रम का निर्धारण शैक्षिक उद्देश्यों के आधार पर ही किया जाता रहा है किन्तु इस सम्बन्ध में विशेष जागरुकता तथा निरन्तरता बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में आई है। पाठ्यक्रम के अन्तर्गत सम्पूर्ण पाठ्यचर्या की सामान्य संरचना आ जाती है। पाठ्यचर्या के अन्तर्गत उसी पाठ्यक्रम का चयन किया जाता है जो पाठ्यचर्या विशेष के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक होते हैं।
पाठ्य सामग्री तैयार करते समय ध्यान देने वाली बाते
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शिक्षकों द्वारा शिक्षण सामग्री का उपयोग शिक्षार्थियों को आसानी और दक्षता के साथ अवधारणा सीखने में मदद करने के लिए किया जाता है। नीचे दी गई शिक्षण सामग्री का उपयोग शिक्षण में किया जाता है:
- शिक्षक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह जिस शिक्षण सामग्री का उपयोग कर रहे है वह छात्रों को पढ़ाए जा रहे विषय के लिए मान्य और प्रासंगिक होनी चाहिए।
- पाठ्यपुस्तक में विस्तृत जानकारी होती है और शिक्षण सामग्री की सुव्यवस्थित प्रस्तुति में विभिन्न उप-विषय और इकाइयाँ होती हैं।
- लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षक को शिक्षण सामग्री को छात्रों के अनुभवों से जोड़ना चाहिए जिससे छात्र उनसे सरलता से जुड़ सकें।
- उदाहरण, वास्तविक मूर्त उदाहरणों को शिक्षण सामग्री के रूप में उपयोग करके प्रासंगिक समझ को विकसित करने के लिए जैसे लोहे में जंग कैसे लगती है और दूध कैसे दही में बदल जाता है आदि प्रकार के प्रश्न किए जाने चाहिए।
- पाठ्य सामग्री किस बारे में है तथा किससे सम्बंधित है इसे निष्कर्ष निकालकर समझा जा सकता है।
अतः यह निष्कर्ष निकलता है की पाठ्य सामग्री किस बारे में है, यह समझना निष्कर्ष निकालना कहलाता है
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